Mushroom ki kheti in hindi, मशरुम की खेती कब और कैसे करें

Mushroom ki kheti in hindi कर आय को बहुत अधिक बढ़ाया जा सकता है। मशरुम की खेती यानि कम लागत में अधिक  फायदा। मशरुम को आप फुल टाइम और पार्ट टाइम स्वरोजगार के रूप में शुरू कर सकते है मशरुम को मौसम के अनुसार उत्पादन किया जा सकता है।

क्या है इस जानकारी में Show

स्वस्थ्य की दृष्टि से मशरुम को आजकल सर्वोत्तम माना जा रहा है जिसके चलते मशरुम की मांग बाजार में बहुत अधिक है। लेकिन उस मात्रा में मशरुम नहीं पहुंच पा रहा है। मशरुम की खेती बेरोजगारों और गृहाणिओ के लिए स्वरोजगार का एक अच्छा माध्यम हो सकता है।  कम लगत में अधिक मुनाफा तो आज हम  मशरुम की खेती के बारे में जानेंगे –

Mushroom क्या है?   मशरुम की खेती  कैसे किया जाता है?

Mushroom क्या है – Mushroom को हिंदी में खुम्भी, ढिंगड़ी और फुटु के नाम से जाना है, यह एक प्रकार का कवक या फफूंद होता है जो छतरी, खुम्भी नुमा आकार का  होता है।  जो अनेक माधयम जैसे पैरा कुट्टी, गेहू कुटी का उपयोग करके इसका खेती किया जा  सकता है। मशरुम की खेती करने के लिए स्पॉन का  उपयोग किया जाता है जिसे मशरुम के बीज के रूप में जाना जाता है

यह मशरुम  एक फफुुंदी पौधा है जो अपना भोजन दुसरे पदार्थ से ग्रहण करता है। विश्व भर में इसके 2000 प्रजातियाॅ पाई जाती है।  जिनमें 200 प्रजातियाॅ भारत में उपलब्ध है। जिसमें से 20-22 प्रजातियाॅ खाने योग्य माना जाता है। kheti के लिए वातावरण में नमी होना आवश्यक होता है  Mushroom ki kheti in hindi के लिए 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक तापमान सर्वोत्तम माना जाता है।

mushroom ki kheti
Mushroom ki kheti in hindi

Mushroom ki kheti ke fayde / मशरूम की खेती के फायदे या लाभ –

1. अतिरिक्त आय का साधन
2. कैलिशियम का अच्छा स्त्रोत
3. विटामिन डी की प्रचुर मात्रा
4. रेशा की मात्रा उपलब्ध
5. कुपोषण से मुक्ति
6. खाने में रूचि

अलगअलग राज्यों में मशरुम को  अलगअलग नमो से जाना जाता है जैसे

  1. छत्तीसगढ़ – फुटु
  2. दिल्ली – कुकुरमुत्ता व छतरी
  3. पंजाब – खुम्भी
  4. राजस्थान  – ढिंगड़ी

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मशरुम  कितने  प्रकार के होते है ? Mushroom ki kheti in hindi

बटन मशरूम – Button Mushroom

बटन मशरुम की खेती के लिए तापमान बहुत  कम होना चाहिए तापमान लगभग 14 से 18 डिग्री तक होना चाहिए एवं myceliam के ग्रोथ होने के लिए 22  से 25  डिग्री तक के तापमान में बटन मशरुम उत्पादन किया जा सकता है।

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ढिंगरी मशरूम (ऑयस्टर मशरुम) – Oyster Mushroom – 

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ऑयस्टर मशरुम 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक तापमान में ऑयस्टर मशरुम का उत्पादन किया जा सकता है जैसे माह सितम्बर से माह मार्च तक ढिंगरी मशरूम या ऑयस्टर मशरुम की खेती किया जा सकता है।

दूधिया मशरूम (मिल्की) – Milky Mushroom –

मिल्की मशरुम 30 डिग्री से लेकर 45  डिग्री तक तापमान में मिल्की मशरुम  का उत्पादन किया जा सकता है।  जैसे माह मार्च  से माह अगस्त तक मिलकी  मशरूम  की खेती किया जा सकता है।  इस प्रकार पुरे वर्ष भर मशरुम की खेती किया जा सकता है।

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मशरुम की खेती हेतु आवश्यक सामग्री क्या क्या लगता है ? – Mushroom ki kheti in hindi

  1. ड्रम – 100 से 1000 लीटर तक
  2. पॉलीथिन PP बैग – 12 x 18 साइज का
  3. रबर बैंड यारस्सी
  4. फॉर्मेलिन
  5. बाविस्टिन
  6. ग्रीन नेट या पॉलीथिन शीट
  7. पानी छिड़काव हेतु – वाटर स्प्रेयर
  8. माध्यम – पैरा कुट्टी, पुआल, गेहू भूषा इत्यादि।

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Oyster Mushroom ki Kheti Kaise Karen / आयस्टर मशरुम की खेती कैसे करें?

समान्य नाम – ढींगरी मशरूमवैज्ञानिक नाम – फ्लूयुरोटस ओएस्ट्रीएटसकुल – फ्लूयुरोटेसी भारत मे यह प्रजाति में लगभग 12 किस्मों को उगाया जाता है, जिसमे 3  मुख्य प्रकार कुछ इस तरह है

1. फ्लोरिडा – 

 यह ऑयस्टर मशरूम आकार में बड़े एवं कम दिनों में प्राप्त हो जाता है। इसकी विशेषता ये है कि तापमान कुछ अधिक होने पर भी यह आसानी से विकास कर लेता है।

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2. सेज़र काजु –

यह ऑयस्टर मशरुम मध्यम आकार एवं कुछ मटमैले रंग के होते है।यह कम तापमान में अच्छा विकास करता है। इसका स्वाद अच्छा होता है।

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3. गुलाबी ऑयस्टर –

यह गुलाबी रंग के सुंदर दिखते हैं। इसका आकार सामान्य होता है एवं यह भी कम ताप में  विकास करता है।

Gulabi Oyester Mushroom

Oyster mushroom ki kheti करने के लिए हमें उत्पादन रूम की जरूरत होती है जो बास, ईट , पॉलीथिन से बनाया जा सकता है रूम में खिड़की ओर दरवाजो में जाली लगी होने चाइये ये अपने आवश्यक्ता अनुसार  बनाया जा सकता है।

 कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा का उपचार करना – 

Mushroom ki kheti के लिए एक माध्यम की जरुरत पड़ती है जैसे पैरा कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। पैरा कुट्टी का अधिक उपयोग किया जाता है पुआल या पैरा को 2 से 3 से. मी. छोटे टुकड़े करा कर प्रयोग करना चाहिए।

इन सभी मध्यमो को बीजाई करने से पहले उपचारित करना आवश्यक होता है जिससे पहले से मौजूद जीवाणु को ख़तम किया जा सके,  जिससे मशरुम की फसल ठीक हो।

पैरा कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा को उपचारित करने की दो विधि है – 
1. रासायनिक विधि और
2. गर्म पानी उपचार विधि 
भूसा का उपचार भूसे में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओ एवं अन्य बीजों का नाश करने हेतु भूसे का उपचार किया जाता है आप निम्नलिखित में से किसी एक विधि से भूसे का उपचार कर सकते है ।

आयस्टर मशरुम की खेतीभूसे का उपचार रासायनिक विधि से Mushroom ki kheti in hindi

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गर्म पानी उपचार विधि

इस विधि में कृषि अवशेषो को छिद्रदार जूट के बोरे में भर कर रात भर गिला किया करना है तथा अगले दिन इस पानी को गर्म कर लगभग 30 – 45 मिनट तक उपचारित किया जाता है है। उपचारित भूसे को ठंडा करने के बाद बीज डाला जा।

रासायनिक विधि – 

इस विधि में कृषि अवशेषो को विशेष प्रकार के कृषि दवाइओ से जीवाणु को मारा जाता है इस विधि में 100 लीटर ड्रम या टब में 90 लीटर पानी में 7.5 ग्राम बावस्टीन तथा 125 मि.ली फोर्मेलिन मिलाया जाता है। जिसमे लगभग २०-२५ किलो सूखे भूसे को पानी में डाला जाता है तथा ड्रम को ऊपर से पॉलीथिन से बांध दे तथा इसे 12 से 18 घंटे तक उपचारित करे।  उपचारती भूसे को 4 से 8 घंटे तक खुले जगह छावदार जगह पर छोड़ दे जिसे इसके अतिरिक्त पानी बहार हो जाए तथा फोर्मे लीन की गंध भी बहार हो जाये।

आयस्टर मशरुम की खेती हेतु रासायनिक विधि में लगने वाले दवाईओ और सामग्री की सूचि

1- Formalin (फोर्मेलिन)   –     125 मि.ली (लगभग 20 से 25 किलो सूखे भूसे)

2- कार्बेन्डाजिम या बावस्टीन  (Bavistin)   –   7.5 ग्राम (लगभग 20 से 25 किलो सूखे भूसे)

3. ड्रम या टब                          –      90   लीटर पानी (लगभग 20 से 25 किलो सूखे भूसे)

4- पैरा कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा ( 20 से 25 KG)

आयस्टर मशरुम खेती की विधि – Mushroom ki kheti in hindi

  1. सर्व प्रथम 200 लीटर वाले ड्रम में 100 लीटर पानी भर लेते है ।
  2. फिर फॉर्मेलिन 125 ml और बाविस्टिन 7 gm को
  3. ड्रम में डालकर अच्छे से डंडे की सहायता से मिलाते हैं।
  4. 10 kg पैरा भूसा/गेंहू भूसा को डालकर हाथो की सहायता से डूबा देते हैं और ढक्कन लगाकर 16 घंटो के लिए छोड़ देते हैं।
  5. 16 घंटे के बाद भूसा को निकालकर ढलाव वाली जमीन में चटाई के ऊपर छांव सुखा देते है ताकी अधिक
  6. पानी बाहर निकल जाये और नमी 30% रह जाये।
  7. नमी की प्रतिशत जानने के लिए भूसा को पकड़कर मुट्ठी में दबाये यदि भूसा से पानी ना निकले पर हथेली गीला  हो तो भुसा बैग में भरने योग्य हो गया है।
  8. बैग भरने के लिए सबसे पहले बैग में 4 – 6इंच भुसा भर ले फिर उसे उल्टे पंजे से कसकर दबाये सभी तरफ फिर स्पान को चारों ओर किनारे पर छोड़ दे फिर पुनः  4-6 इंच भुसा भरकर उल्टे पन्जे से सभी तरफ दबाये और चारो ओर कीनारे पर बिजाई करें।यह क्रिया 5-6 बार दोहराये जब तक बैग 75% भर ना जायें।
  9. जब बैग 75% भर जाता है तब बैग के मुंह को रबर या रस्सी से बांध देवें,और बैग के चारो ओर कुछ छेद कर देवें ताकी अतिरिक्त जल बाहर हो जाएं।
  10. अब प्लास्टिक की रस्सी से सिकाई का निर्माण कर ले और सिकाई में मशरूम बैग को लटका दें।
  11. मशरूम बैग को स्वच्छ एवं अंधेरे युक्त कमरे में ही लटकाना चाहिए,इसकी खेती में स्वच्छकता का विशेष ध्यान रखना होता है।
  12. लगभग 20 दिन में माईसेलियम पूरी तरह फैल जाता है और लगभग 25 दिन में हमे पहला फसल प्राप्त हो जाता है।
  13. फसल की तोड़ाई के लिए मशरूम को पकड़कर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमाये ताकी बैग को कोई नुकसान ना हो,तुड़ाई के बाद प्लास्टिक बैग को ब्लेड की सहायता से फाड़कर अलग कर दे।
  14. प्लास्टिक अलग होने के बाद सिंचाई की रोज़ अवश्यकता होती है सामान्य मौशम में प्रतिदिन 2 बार और गर्मी अधिक होने पर प्रति दिन 3-5बार सिंचाई जरूरी है।
  15. फसल पहली तुड़ाई से 20 से 25 दिन तक प्राप्त कर सकते है।

बिजाई करना

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Oyster Mushroom का बिजाई हमेशा ताजा प्रयोग करना चाहिए भूसा तैयार करने से पहले ही स्पॉन  खरीद लेना चाहिए तथा एक कुंटल सूखे भूसे के लिए 10 किलो मशरुम बीच अर्थात स्पॉन  की जरूरत होती है गर्मियों के मौसम में प्लूरोटस सजार काजू को उगाना चाहिए।

सर्दियों में जब वातावरण का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो तो प्लूरोटस फ्लोरिडा, कोर्नुकोपिया मशरुम को उगाना चाहिए। बीजाई करने से पहले सबसे पहले स्पॉन खरीद कर रखना चाहिए। 

स्पॉन खरीदते समय देख लेना चाइये की स्पॉन में कवक पूरी तरह फैला है की नहीं और अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। 10 किलो भूसे में 1 किलो स्पॉन का प्रयोग करना चाहिए।बिजाई करने से दो दिन पहले बीजाई रूम को फोर्मे लीन से उपचारित कर लेना चाहिए।

बीजाई करने के लिए पीपी बैग का चुनाव कर बैग को 4 – 4 इंच की उपचारित पैरा भूषा से भरे 4 – 4 इंच की उचाई में स्पॉन की बिजाई करे। और अंत में बैग की ऊपरी सिरे को रबर बैंड से बांध दे और बैग में अलग अलग जगह में कुल 12 से 16 छिद्र बना दे।

फसल प्रबंधन – Mushroom ki kheti in hindi

बीजाई किये गए बैग को 15 दिनों तक एक रूम रखे जहा पर हवा अंदर बाहर ना हो, अंधेला हो, बिना कारण कोई भी उस रूम में प्रवेश नर करे।   

क्योकि यह समय बैग में कवक जाल फैलने का होता आपके अच्छे फसल के लिए बैग में कवक जाल का फैलना अति महत्वपूर्ण है 15 दिनों बाद बैग में पानी डालना शुरू करे जिससे 20 से 25 दिन बाद मशरुम आना शुरू होगा।

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बिजाई करने के पश्चात थैलियों को एक उत्पादन कक्ष में बीज फैलाने के लिए रख दिया जाता है। 

बैगो  को हफ्ते में एक बार अवश्य देख लेना चाहिए कि बीच फैल रहा है या नहीं यदि किसी बैग में हरा काला या नीले रंग की फाफुंद दिखाई दे तो ऐसे बैगों को उत्पादन कक्ष से बाहर निकाल कर दूर फेंक देना चाहिए।

बीज फैलाते समय हवा या प्रकाश की जरूरत नहीं होती है। अगर बैग तथा कमरे का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ने लगे तो कमरे की दीवारों तथा छत पर पानी का छिड़काव दो से तीन बार करना चाहिए।

इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बैगो  पर पानी जमा ना हो लगभग 15 से 25 दिनों में मशरूम का कवक जाल सारे भूसे पर फैल जाता है।

बैग सफेद रंग का प्रतीत होने लगता है इस स्थिति में पॉलिथीन को हटा लेना चाहिए गर्मियों के दिनों में पालीथीन  को पूरा नहीं हटाना चाहिए क्योंकि बैगो  में नमी की कमी हो सकती है।

उत्पादन कमरों में उत्पादन कमरों में प्रतिदिन दो से तीन बार खिड़कियां खुली रखनी चाहिए जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 800 पीपीएम से अधिक ना हो। 

ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होने से आष्टा का आकार बड़ा हो जाता है तथा छतरी छोटी रह जाती है। पालीथीन को खोलने के बाद लगभग 1 सप्ताह में मशरूम की छोटी-छोटी कालिया  बनने लगती है जो 4 से 5 दिनों में पूर्ण आकार ले लेती है।

मशरुम की तुड़ाई करना – Mushroom ki kheti in hindi

फसल में 20 से 25 दिन बाद मशरुम आना शुरू जायेगा। मशरुम की तुड़ाई हम हाथ से या चाकू से कर सकते है मशरुम की तुड़ाई करते समय ध्यान रखे की जिस मशरुम की छत्तरी ऊपर  मुड़ने वही मशरुम तोड़ने लायक हो जाता है तुड़ाई हमेशा पानी छिड़काव करने से पहले करना चाहिए।

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मशरूम तोड़ने के बाद डंठल के साथ लगे हुए भूसे को चाकू से काट कर हटा देना चाहिए पहली फसल के 8 से 10 दिन बाद दूसरी फसल आती है पहली फसल कुल उत्पादन का लगभग आधा या उससे ज्यादा होती है।

इस तरह तीन फसलों तक उत्पादन ज्यादा होता है उसके बाद बैग  को किसी गहरे गड्ढे में डाल देना चाहिए जिससे उसे खाद बनाई जा सके तथा बाद में उसे  खेतों में प्रयोग कर सके।   

जितने भी मशरुम की  व्यवसाई प्रजातियां है उनमें 1 किलो सूखे भूसे से लगभग औसतन 600 से 800 ग्राम तक पैदावार मिलती है।

भंडारण / पैकिंग

ओयस्टर मशरूम तोड़ने के बाद उसे तुरंत पालीथीन  में पैक  नहीं करना चाहिए। अपितु लगभग 2 घंटे कपड़े पर फैलाकर छोड़ देना चाहिए। 

जिससे कि उसमें मौजूद नमी उड़ जाए ताजा  ओयस्टर मशरूम को  पॉलिथीन में भरकर रेफ्रिजरेटर में 2 से 4 दिन तक रखा जा सकता है ओयस्टर मशरूम को ओवन में या धूप में सुखाकर वर्षभर उपयोग में लाया जा सकता है।

आय

मशरुम उत्पादन एक  लाभकारी स्वरोजगार है जिसमे काम लगत पर अधिक मुनाफा कमाया जा सकत है। 

एक फसल चक्र 40 से 50 दिन का होता है जिमे 1 किलो मशरुम उत्पादन में 20 से 30 रूपये लागत आता है  तथा इसे मार्किट में 150 से 200 रूपये किलो तक बेचा जा सकता है।

Mushroom ki kheti kaise kare – Mushroom ki kheti in hindi

मशरुम की खेती कैसे करें – 

  1. ड्रम 100 लीटर पानी भर कर रसायन को मिलाना
    और पैरा कुटी अच्छे मिला कर न्यूनत्म 16 घंटे तक के लिए ढ़क देना चाहिए।
  2. 16 – 20  घंटे बाद भुसा को साफ चटाई में छाव में सुखाना चाहिए। नमी 30 प्रतिशत होने तक सुखाना चाहिए इसके लिए भुसा को मुठ्ठी में दबा कर देखा जाता हैं यदि पानी ना टपके और हाथ गीला हो तो नमी 30 प्रतिशत है।
  3. इसके बाद बैग में तीन विधियों से भरा जाता है।
    1. सम्पूर्ण मिश्रण
    2. समूह मिश्रण
    3. परतदार विधि
  4. बैग में बीच ओर भुसा भरने के बाद उसमे कुछ छेद कर दिया जाता है। और शिका बना कर लटका दिया जाता है।
  5. जब माईशिलियम पुरा फेल जाता हैं तब सभी तरफ सफेद परत जमा हो जाता है। तब पालीथिन को फाड दिया जाना चाहिए।
  6. पालीथिन फाडने के बाद रोज सिचाई की आवश्कता होती कम से कम रोज 2 बार।
  7. मशरूम की तुडाई हमेशा गांठ को पकड़ कर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमा कर तोडना चाहिए।

Mushroom ki kheti training center – Mushroom ki kheti in hindi

मशरुम की खेती ट्रेनिंग सेंटर : –

वर्तमान समय में मशरुम की व्यवसायिक खेती किया जा रहा और स्वरोजगार का एक अच्छा अवसर के रूप में मिला है। अगर  मशरुम की खेती की सम्पूर्ण जानकारी ले के  किया जाये तो निश्चित सफलता मिलेगी। 

मशरुम उत्पादन मशरुम की खेती की एक वैज्ञानिक विधि है। अतः इसके लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की जरुरत पड़ती है मशरुम की खेती के लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण निम्नलिखित संस्थाओ से प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि विज्ञानं केंद्र

सभी प्रतयेक जिले में स्थित कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर मशरुम की खेती की ट्रेनिंग प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर कृषि वैज्ञानिक द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है।

यह ट्रेनिंग प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी व प्रशिक्षण हेतु अपने जिले की कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर सकते है।

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान

भारत में कुल 550 से अधिक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान वर्तमान में mushroom ki kheti मशरुम उत्पादन या मशरुम की खेती में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है।

प्रशिक्षण निःशुल्क दिया जा रहा है अपने जिले के  ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे।

लाइवलीहुड कॉलेज धमतरी –

अगर आप छत्तीसगढ़ के निवासी है तो अपने जिले के  लाइवलीहुड कॉलेज  में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे। जहा पर प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता  है 

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मशरुम की खेती में  – मशरूम की कीट, बीमारियां एवं प्रबंधन – Mushroom ki kheti in hindi

1.काब वेब – 

यह बीमारी मशरूम पर रुई की तरह जाल बना लेती है जिससे इसमे सड़न वाली बदबू आती है।

रोकथाम –  इसकी रोकथाम के लिए बाविस्टिन 0.5gm प्रति लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करें।

2. भुरा/पिला/काला धब्बा – 

यह दिनों रंग के बीमारी एक ही कारक से होता है, जो मशरूम में धब्बे के रूप में दिखाई देते है और मशरूम सड़ा हुआ प्रतीत होता है।

रोकथाम– इसकी रोकथाम के लिए 100 ppm स्ट्रेप्टो सायकलिन का छिड़काव करें।

3. सेसिड मक्खी – 

यह मक्खियाँ बहुत सूक्ष्म होती है, इन्हें इनके छोटे लार्वो की सहायता से पाचाना जा सकता है, जो पदरहित व सफेद और नारंगी रंग के होते हैं| इनका सिर स्पष्ट नहीं होता, यद्यपि इनके सिर के स्थान पर दो बिन्दु मौजूद होते हैं| सेसिड की प्रजनन-क्षमता बहुत तीव्र होती है, जिसके परिणाम स्वरूप यह मशरूम उत्पादन को भारी हानि पहुँचाते हैं| इनके लार्वा, कवक जाल, डंडों के बाहरी भाग को खा जाते हैं|

रोकथाम – साफ-सफाई- मशरूम की कीट रोकथाम के लिए साफ-सफाई मशरूम (खुम्ब) उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है| इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए, कि उत्पादन कक्ष के आस-पास स्पेन्ट कम्पोस्ट की ढेरी नहीं पड़ी हो, खाद बनाने के प्रांगण में खाद बनाने के 24 घंटे पूर्व 2 प्रतिशत फार्मेलीन का छिड़काव करना चाहिए|

रोकथाम के लिए फसल में इनका प्रकोप हो तो डाईकलोरोवोस की 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव थैलों, पेटियों, दीवारों और फर्श पर करें|

फोरिड मक्खी –  Mushroom ki kheti in hindi

यह एक छोटी 2.3 मिलीमीटर कूबड़ युक्त पीठ वाली मक्खी है, इनके लार्वो का रंग सफेद होता है तथा यह पदरहित होते हैं, जिनका रंग भूरा-काला होता है| लार्वा के मुडक का सिर नुकीला होता है| ये तेज गति से इधर-उधर भागती है, मादा प्रौढ़ मक्खियाँ बढ़ते हुए मशरूम की गीले सतहों पर अंडे देती है, लार्वा मशरूम के डण्डों पर सुरंग बनाते हैं| खाद में एक मादा लगभग 50 अण्डे देती है|

रोकथाम – साफ-सफाई- मशरूम की कीट रोकथाम के लिए साफ-सफाई मशरूम (खुम्ब) उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है| इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए, कि उत्पादन कक्ष के आस-पास स्पेन्ट कम्पोस्ट की ढेरी नहीं पड़ी हो, खाद बनाने के प्रांगण में खाद बनाने के 24 घंटे पूर्व 2 प्रतिशत फार्मेलीन का छिड़काव करना चाहिए|

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Oyster mushroom spawn / seeds – मशरूम स्पॉन बीज क्या है 

मशरूम स्पॉन बीज क्या है – मशरूम स्पॉन सरल शब्दो में एक पदार्थ है जिसे गेहू के दाने में मायसेलियम कवक के विकास जाल को फैलाया जाता है।   माइसेलियम, थ्रेड-जैसे कोशिकाओं का एक संग्रह है।  स्पॉन का उपयोग किसी भी सामग्री पर माइसेलियम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है जिसमें से मशरूम बढ़ेगा, जिसे सब्सट्रेट [पैरा कुट्टी या गेहू कुट्टी ] कहा जाता है।

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Conclusion –

इस प्रकार से Mushroom ki kheti in hindi कर आमदनी को बढ़ाया जा सकता है। मशरुम की खेती यानि काम समय में अधिक मुनाफा।मशरुम हेतु पुरे समय देने की जरुरत नहीं होता केवल अपने खली समय में कार्य करे बाकि टाइम अपना अन्य कार्यो को किया जा सकता है।

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मशरुम उत्पादन मशरुम की खेती की एक वैज्ञानिक विधि है। अतः इसके लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की जरुरत पड़ती है मशरुम की खेती के लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण निम्नलिखित संस्थाओ से प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि विज्ञानं केंद्र
सभी प्रतयेक जिले में स्थित कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर मशरुम की खेती की ट्रेनिंग प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर कृषि वैज्ञानिक द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। यह ट्रेनिंग प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी व प्रशिक्षण हेतु अपने जिले की कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर सकते है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान –
भारत में कुल 550 से अधिक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान वर्तमान में mushroom ki kheti में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है।
प्रशिक्षण निःशुल्क दिया जा रहा है अपने जिले के  ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे।

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