Mushroom ki kheti मशरुम की खेती कब और कैसे करें

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Mushroom ki kheti कर आय को बहुत अधिक बढ़ाया जा सकता है। मशरुम की खेती यानि कम लागत में अधिक  फायदा। मशरुम को आप फुल टाइम और पार्ट टाइम स्वरोजगार के रूप में शुरू कर सकते है मशरुम को मौसम के अनुसार उत्पादन किया जा सकता है।

स्वस्थ्य की दृष्टि से मशरुम को आजकल सर्वोत्तम माना जा रहा है जिसके चलते मशरुम की मांग बाजार में बहुत अधिक है।   लेकिन उस मात्रा में मशरुम नहीं पहुंच पा रहा है। मशरुम की खेती बेरोजगारों और गृहाणिओ के लिए स्वरोजगार का एक अच्छा माध्यम हो सकता है।  कम लगत में अधिक मुनाफा तो आज हम  मशरुम की खेती के बारे में जानेंगे –

क्या है इस जानकारी में show

Mushroom ki kheti  मशरुम की खेती  

Mushroom एक प्रकार का कवक या फफूंद होता है जो छतरी, खुम्भी नुमा आकार का  होता है।  जो अनेक माधयम जैसे पैरा कुट्टी, गेहू कुटी का उपयोग करके इसका खेती किया जा  सकता है।

mushroom ki kheti

mushroom ki kheti करने के लिए स्पॉन का  उपयोग किया जाता है जिसे मशरुम के बीज के रूप में जाना जाता है।

यह मशरुम  एक फफुुंदी पौधा है जो अपना भोजन दुसरे पदार्थ से ग्रहण करता है। विश्व भर में इसके 2000 प्रजातियाॅ पाई जाती है।

जिनमें 200 प्रजातियाॅ भारत में उपलब्ध है। जिसमें से 20-22 प्रजातियाॅ खाने योग्य माना जाता है। kheti के लिए वातावरण में नमी होना आवश्यक होता है  Mushroom ki kheti   के लिए 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक तापमान सर्वोत्तम माना जाता है।

Mushroom ki kheti ke fayde

मशरूम की खेती के फायदे या लाभ –

1. अतिरिक्त आय का साधन
2. कैलिशियम का अच्छा स्त्रोत
3. विटामिन डी की प्रचुर मात्रा
4. रेशा की मात्रा उपलब्ध
5. कुपोषण से मुक्ति
6. खाने में रूचि

अलगअलग राज्यों में मशरुम को  अलगअलग नमो से जाना जाता है जैसे

  1. छत्तीसगढ़ – फुटु
  2. दिल्ली – कुकुरमुत्ता व छतरी
  3. पंजाब – खुम्भी

४. राजस्थान  – ढिंगड़ी

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मशरुम  कितने  प्रकार के होते है ?

बटन मशरूम – Button Mushroom

बटन मशरुम की खेती के लिए तापमान बहुत  कम होना चाहिए तापमान लगभग 14 से 18 डिग्री तक होना चाहिए एवं myceliam के ग्रोथ होने के लिए 22  से 25  डिग्री तक के तापमान में बटन मशरुम उत्पादन किया जा सकता है।

mushroom ki kheti

ढिंगरी मशरूम (ऑयस्टर मशरुम) – Oyster Mushroom – 

ऑयस्टर मशरुम 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक तापमान में ऑयस्टर मशरुम का उत्पादन किया जा सकता है जैसे माह सितम्बर से माह मार्च तक ढिंगरी मशरूम या ऑयस्टर मशरुम की खेती किया जा सकता है।mushroom ki kheti

दूधिया मशरूम (मिल्की) – Milky Mushroom –

मिल्की मशरुम 30 डिग्री से लेकर 45  डिग्री तक तापमान में मिल्की मशरुम  का उत्पादन किया जा सकता है।  जैसे माह मार्च  से माह अगस्त तक मिलकी  मशरूम  की खेती किया जा सकता है।  इस प्रकार पुरे वर्ष भर मशरुम की खेती किया जा सकता है।

mushroom ki kheti

मशरुम की खेती हेतु आवश्यक सामग्री क्या क्या लगता है ?

  1. ड्रम – 100 से 1000 लीटर तक
  2. पॉलीथिन PP बैग – 12 x 18 साइज का
  3. रबर बैंड यारस्सी
  4. फॉर्मेलिन
  5. बाविस्टिन
  6. ग्रीन नेट या पॉलीथिन शीट
  7. पानी छिड़काव हेतु – वाटर स्प्रेयर
  8. माध्यम – पैरा कुट्टी, पुआल, गेहू भूषा इत्यादि।

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Oyster mushroom ki kheti kaise kare

आयस्टर मशरुम की खेती कैसे करें, होता है की सम्पूर्ण जानकारी ?

Oyster mushroom ki kheti करने के लिए हमें उत्पादन रूम की जरूरत होती है जो बास, ईट , पॉलीथिन से बनाया जा सकता है रूम में खिड़की ओर दरवाजो में जाली लगी होने चाइये ये अपने आवश्यक्ता अनुसार  बनाया जा सकता है।

पोषाधार तैयार करना [ भूसा का उपचार ]– 

Mushroom ki kheti के लिए एक माध्यम की जरुरत पड़ती है जैसे पैरा कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। पैरा कुट्टी का अधिक उपयोग किया जाता है पुआल या पैरा को 2 से 3 से. मी. छोटे टुकड़े करा कर प्रयोग करना चाहिए।

इन सभी मध्यमो को बीजाई करने से पहले उपचारित करना आवश्यक होता है जिससे पहले से मौजूद जीवाणु को ख़तम किया जा सके,  जिससे मशरुम की फसल ठीक हो।

पैरा कुट्टी, पुआल या गेहू की भूषा को उपचारित करने की दो विधि है –  रासायनिक विधि और गर्म पानी उपचार विधि भूसा का उपचार भूसे में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओ एवं अन्य बीजों का नाश करने हेतु भूसे का उपचार किया जाता है आप निम्नलिखित में से किसी एक विधि से भूसे का उपचार कर सकते है ।

मशरुम की खेतीभूसे का उपचार रासायनिक विधि से

mushroom ki kheti

गर्म पानी उपचार विधि

इस विधि में कृषि अवशेषो को छिद्रदार जूट के बोरे में भर कर रात भर गिला किया करना है तथा अगले दिन इस पानी को गर्म कर लगभग 30 – 45 मिनट तक उपचारित किया जाता है है। उपचारित भूसे को ठंडा करने के बाद बीज डाला जा।

रासायनिक विधि – 

इस विधि में कृषि अवशेषो को विशेष प्रकार के कृषि दवाइओ से जीवाणु को मारा जाता है इस विधि में 100 लीटर ड्रम या टब में 90 लीटर पानी में 7.5 ग्राम बावस्टीन तथा 125 मि.ली फोर्मेलिन मिलाया जाता है। जिसमे लगभग २०-२५ किलो सूखे भूसे को पानी में डाला जाता है तथा ड्रम को ऊपर से पॉलीथिन से बांध दे तथा इसे 12 से 18 घंटे तक उपचारित करे।  उपचारती भूसे को 4 से 8 घंटे तक खुले जगह छावदार जगह पर छोड़ दे जिसे इसके अतिरिक्त पानी बहार हो जाए तथा फोर्मे लीन की गंध भी बहार हो जाये।

Mushroom ki kheti मशरुम की खेती हेतु रासायनिक विधि में लगने वाले दवाईओ और सामग्री की सूचि

  1. फोर्मेलिन                               –     125 मि.ली (लगभग २०-२५ किलो सूखे भूसे)
  2. कार्बेन्डाजिम या बावस्टीन     –     7.5 ग्राम (लगभग २०-२५ किलो सूखे भूसे)
  3. ड्रम या टब                          –      90   लीटर पानी (लगभग २०-२५ किलो सूखे भूसे)

बिजाई करना

Oyster Mushroom का बिजाई हमेशा ताजा प्रयोग करना चाहिए भूसा तैयार करने से पहले ही स्पॉन  खरीद लेना चाहिए तथा एक कुंटल सूखे भूसे के लिए 10 किलो मशरुम बीच अर्थात स्पॉन  की जरूरत होती है गर्मियों के मौसम में प्लूरोटस सजार काजू को उगाना चाहिए।mushroom ki kheti

सर्दियों में जब वातावरण का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो तो प्लूरोटस फ्लोरिडा, कोर्नुकोपिया मशरुम को उगाना चाहिए। बीजाई करने से पहले सबसे पहले स्पॉन खरीद कर रखना चाहिए। 

स्पॉन खरीदते समय देख लेना चाइये की स्पॉन में कवक पूरी तरह फैला है की नहीं और अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। 10 किलो भूसे में 1 किलो स्पॉन का प्रयोग करना चाहिए।बिजाई करने से दो दिन पहले बीजाई रूम को फोर्मे लीन से उपचारित कर लेना चाहिए।

बीजाई करने के लिए पीपी बैग का चुनाव कर बैग को 4 – 4 इंच की उपचारित पैरा भूषा से भरे 4 – 4 इंच की उचाई में स्पॉन की बिजाई करे। और अंत में बैग की ऊपरी सिरे को रबर बैंड से बांध दे और बैग में अलग अलग जगह में कुल 12 से 16 छिद्र बना दे।

फसल प्रबंधन

बीजाई किये गए बैग को 15 दिनों तक एक रूम रखे जहा पर हवा अंदर बाहर ना हो, अंधेला हो, बिना कारण कोई भी उस रूम में प्रवेश नर करे।   

क्योकि यह समय बैग में कवक जाल फैलने का होता आपके अच्छे फसल के लिए बैग में कवक जाल का फैलना अति महत्वपूर्ण है 15 दिनों बाद बैग में पानी डालना शुरू करे जिससे 20 से 25 दिन बाद मशरुम आना शुरू होगा।

mushroom ki kheti

बिजाई करने के पश्चात थैलियों को एक उत्पादन कक्ष में बीज फैलाने के लिए रख दिया जाता है। 

बैगो  को हफ्ते में एक बार अवश्य देख लेना चाहिए कि बीच फैल रहा है या नहीं यदि किसी बैग में हरा काला या नीले रंग की फाफुंद दिखाई दे तो ऐसे बैगों को उत्पादन कक्ष से बाहर निकाल कर दूर फेंक देना चाहिए।

बीज फैलाते समय हवा या प्रकाश की जरूरत नहीं होती है। अगर बैग तथा कमरे का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ने लगे तो कमरे की दीवारों तथा छत पर पानी का छिड़काव दो से तीन बार करना चाहिए।

इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बैगो  पर पानी जमा ना हो लगभग 15 से 25 दिनों में मशरूम का कवक जाल सारे भूसे पर फैल जाता है।

बैग सफेद रंग का प्रतीत होने लगता है इस स्थिति में पॉलिथीन को हटा लेना चाहिए गर्मियों के दिनों में पालीथीन  को पूरा नहीं हटाना चाहिए क्योंकि बैगो  में नमी की कमी हो सकती है।

उत्पादन कमरों में उत्पादन कमरों में प्रतिदिन दो से तीन बार खिड़कियां खुली रखनी चाहिए जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 800 पीपीएम से अधिक ना हो। 

ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होने से आष्टा का आकार बड़ा हो जाता है तथा छतरी छोटी रह जाती है। पालीथीन को खोलने के बाद लगभग 1 सप्ताह में मशरूम की छोटी-छोटी कालिया  बनने लगती है जो 4 से 5 दिनों में पूर्ण आकार ले लेती है।

मशरुम की तुड़ाई करना

फसल में 20 से 25 दिन बाद मशरुम आना शुरू जायेगा। मशरुम की तुड़ाई हम हाथ से या चाकू से कर सकते है मशरुम की तुड़ाई करते समय ध्यान रखे की जिस मशरुम की छत्तरी ऊपर  मुड़ने वही मशरुम तोड़ने लायक हो जाता है तुड़ाई हमेशा पानी छिड़काव करने से पहले करना चाहिए।

mushroom ki kheti

मशरूम तोड़ने के बाद डंठल के साथ लगे हुए भूसे को चाकू से काट कर हटा देना चाहिए पहली फसल के 8 से 10 दिन बाद दूसरी फसल आती है पहली फसल कुल उत्पादन का लगभग आधा या उससे ज्यादा होती है।

इस तरह तीन फसलों तक उत्पादन ज्यादा होता है उसके बाद बैग  को किसी गहरे गड्ढे में डाल देना चाहिए जिससे उसे खाद बनाई जा सके तथा बाद में उसे  खेतों में प्रयोग कर सके।   

जितने भी मशरुम की  व्यवसाई प्रजातियां है उनमें 1 किलो सूखे भूसे से लगभग औसतन 600 से 800 ग्राम तक पैदावार मिलती है।

भंडारण / पैकिंग

ओयस्टर मशरूम तोड़ने के बाद उसे तुरंत पालीथीन  में पैक  नहीं करना चाहिए। अपितु लगभग 2 घंटे कपड़े पर फैलाकर छोड़ देना चाहिए। 

जिससे कि उसमें मौजूद नमी उड़ जाए ताजा  ओयस्टर मशरूम को  पॉलिथीन में भरकर रेफ्रिजरेटर में 2 से 4 दिन तक रखा जा सकता है ओयस्टर मशरूम को ओवन में या धूप में सुखाकर वर्षभर उपयोग में लाया जा सकता है।

आय

मशरुम उत्पादन एक  लाभकारी स्वरोजगार है जिसमे काम लगत पर अधिक मुनाफा कमाया जा सकत है। 

एक फसल चक्र 40 से 50 दिन का होता है जिमे 1 किलो मशरुम उत्पादन में 20 से 30 रूपये लागत आता है  तथा इसे मार्किट में 150 से 200 रूपये किलो तक बेचा जा सकता है।

Mushroom ki kheti kaise kare

मशरुम की खेती कैसे करें

  1. ड्रम 100 लीटर पानी भर कर रसायन को मिलाना
    और पैरा कुटी अच्छे मिला कर न्यूनत्म 16 घंटे तक के लिए ढ़क देना चाहिए।
  2.   16 – 20  घंटे बाद भुसा को साफ चटाई में छाव में सुखाना चाहिए। नमी 30 प्रतिशत होने तक सुखाना चाहिए इसके लिए भुसा को मुठ्ठी में दबा कर देखा जाता हैं यदि पानी ना टपके और हाथ गीला हो तो नमी 30 प्रतिशत है।
  3. इसके बाद बैग में तीन विधियों से भरा जाता है।
    1. सम्पूर्ण मिश्रण
    2. समूह मिश्रण
    3. परतदार विधि
  4. बैग में बीच ओर भुसा भरने के बाद उसमे कुछ छेद कर दिया जाता है। और शिका बना कर लटका दिया जाता है।
  5. जब माईशिलियम पुरा फेल जाता हैं तब सभी तरफ सफेद परत जमा हो जाता है। तब पालीथिन को फाड दिया जाना चाहिए।
  6. पालीथिन फाडने के बाद रोज सिचाई की आवश्कता होती कम से कम रोज 2 बार।
  7. मशरूम की तुडाई हमेशा गांठ को पकड़ कर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमा कर तोडना चाहिए।

Mushroom ki kheti training center –  

मशरुम की खेती  ट्रेनिंग सेंटर : –

वर्तमान समय में मशरुम की व्यवसायिक खेती किया जा रहा और स्वरोजगार का एक अच्छा अवसर के रूप में मिला है। अगर  मशरुम की खेती की सम्पूर्ण जानकारी ले के  किया जाये तो निश्चित सफलता मिलेगी। 

मशरुम उत्पादन मशरुम की खेती की एक वैज्ञानिक विधि है। अतः इसके लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की जरुरत पड़ती है मशरुम की खेती के लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण निम्नलिखित संस्थाओ से प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि विज्ञानं केंद्र

सभी प्रतयेक जिले में स्थित कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर मशरुम की खेती की ट्रेनिंग प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर कृषि वैज्ञानिक द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है।

यह ट्रेनिंग प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी व प्रशिक्षण हेतु अपने जिले की कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर सकते है।

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान

भारत में कुल 550 से अधिक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान वर्तमान में mushroom ki kheti मशरुम उत्पादन या मशरुम की खेती में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है।

प्रशिक्षण निःशुल्क दिया जा रहा है अपने जिले के  ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे।

लाइवलीहुड कॉलेज धमतरी –

अगर आप छत्तीसगढ़ के निवासी है तो अपने जिले के  लाइवलीहुड कॉलेज  में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे। जहा पर प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता  है 

 ये भी पढ़े :- मखाना की खेती कैसे किया जाता है ?

मशरुम की खेती में  – मशरूम की बीमारियां एवं प्रबंधन

  1. कवक जनित रोग
  2. वेट बबल या माइकोगोन रोग
  3. ड्राई बबल याबबल या भूरा दाग या वर्टिसिलियम रोग
  4. ट्रफल रोग
  5. हरि फफूंद या ट्राइकोडरमा रोग
  6. भूरा गोल्ड या ब्राउन प्लासटोमोल्ड
  7.  सफेद प्लास्टर मोल्ड
  8.  ग्रीन गोल्ड

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Oyster mushroom spawn / seeds – 

मशरूम स्पॉन सरल शब्दो में एक पदार्थ है जिसे गेहू के दाने में मायसेलियम कवक के विकास जाल को फैलाया जाता है।   माइसेलियम, थ्रेड-जैसे कोशिकाओं का एक संग्रह है।  

स्पॉन का उपयोग किसी भी सामग्री पर माइसेलियम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है जिसमें से मशरूम बढ़ेगा, जिसे सब्सट्रेट [पैरा कुट्टी या गेहू कुट्टी ] कहा जाता है।

Mushroom ki Kheti
Mushroom ki Kheti Spawn

Conclusion –

इस प्रकार से mushroom ki kheti कर आमदनी को बढ़ाया जा सकता है। मशरुम की खेती यानि काम समय में अधिक मुनाफा। मशरुम हेतु पुरे समय देने की जरुरत नहीं होता केवल अपने खली समय में कार्य करे बाकि टाइम अपना अन्य कार्यो को किया जा सकता है।

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Mushroom ki kheti
मशरूम की खेती के फायदे या लाभ क्या है ?

अतिरिक्त आय का साधन
कैलिशियम का अच्छा स्त्रोत
विटामिन डी की प्रचुर मात्रा
रेशा की मात्रा उपलब्ध
कुपोषण से मुक्ति
खाने में रूचि

Mushroom ki kheti ki training center

मशरुम उत्पादन मशरुम की खेती की एक वैज्ञानिक विधि है। अतः इसके लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण की जरुरत पड़ती है मशरुम की खेती के लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण निम्नलिखित संस्थाओ से प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि विज्ञानं केंद्र
सभी प्रतयेक जिले में स्थित कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर मशरुम की खेती की ट्रेनिंग प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर कृषि वैज्ञानिक द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। यह ट्रेनिंग प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी व प्रशिक्षण हेतु अपने जिले की कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर सकते है।

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान –
भारत में कुल 550 से अधिक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान वर्तमान में mushroom ki kheti में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है।
प्रशिक्षण निःशुल्क दिया जा रहा है अपने जिले के  ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संसथान में ट्रेनिंग के लिए संपर्क करे।

मशरुम की खेती में  – मशरूम की बीमारियां एवं प्रबंधन

कवक जनित रोग
वेट बबल या माइकोगोन रोग
ड्राई बबल याबबल या भूरा दाग या वर्टिसिलियम रोग
ट्रफल रोग
हरि फफूंद या ट्राइकोडरमा रोग
भूरा गोल्ड या ब्राउन प्लासटोमोल्ड
 सफेद प्लास्टर मोल्ड
 ग्रीन गोल्ड

Mushroom ki kheti ghar par kaise kare

ड्रम 100 लीटर पानी भर कर रसायन को मिलाना
और पैरा कुटी अच्छे मिला कर न्यूनत्म 16 घंटे तक के लिए ढ़क देना चाहिए।
16 – 20  घंटे बाद भुसा को साफ चटाई में छाव में सुखाना चाहिए। नमी 30 प्रतिशत होने तक सुखाना चाहिए इसके लिए भुसा को मुठ्ठी में दबा कर देखा जाता हैं यदि पानी ना टपके और हाथ गीला हो तो नमी 30 प्रतिशत है।
इसके बाद बैग में तीन विधियों से भरा जाता है।
1. सम्पूर्ण मिश्रण
2. समूह मिश्रण
3. परतदार विधि
बैग में बीच ओर भुसा भरने के बाद उसमे कुछ छेद कर दिया जाता है। और शिका बना कर लटका दिया जाता है।
जब माईशिलियम पुरा फेल जाता हैं तब सभी तरफ सफेद परत जमा हो जाता है। तब पालीथिन को फाड दिया जाना चाहिए।
पालीथिन फाडने के बाद रोज सिचाई की आवश्कता होती कम से कम रोज 2 बार।
मशरूम की तुडाई हमेशा गांठ को पकड़ कर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमा कर तोडना चाहिए।

Mushroom ki kheti kaise kare

ड्रम 100 लीटर पानी भर कर रसायन को मिलाना
और पैरा कुटी अच्छे मिला कर न्यूनत्म 16 घंटे तक के लिए ढ़क देना चाहिए।
16 – 20  घंटे बाद भुसा को साफ चटाई में छाव में सुखाना चाहिए। नमी 30 प्रतिशत होने तक सुखाना चाहिए इसके लिए भुसा को मुठ्ठी में दबा कर देखा जाता हैं यदि पानी ना टपके और हाथ गीला हो तो नमी 30 प्रतिशत है।
इसके बाद बैग में तीन विधियों से भरा जाता है।
1. सम्पूर्ण मिश्रण
2. समूह मिश्रण
3. परतदार विधि
बैग में बीच ओर भुसा भरने के बाद उसमे कुछ छेद कर दिया जाता है। और शिका बना कर लटका दिया जाता है।
जब माईशिलियम पुरा फेल जाता हैं तब सभी तरफ सफेद परत जमा हो जाता है। तब पालीथिन को फाड दिया जाना चाहिए।
पालीथिन फाडने के बाद रोज सिचाई की आवश्कता होती कम से कम रोज 2 बार।
मशरूम की तुडाई हमेशा गांठ को पकड़ कर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमा कर तोडना चाहिए।
mushroom ki khetimushroom ki kheti

मशरुम की खेती हेतु आवश्यक सामग्री क्या क्या लगता है ?

ड्रम – 100 से 1000 लीटर तक
पॉलीथिन PP बैग – 12 x 18 साइज का
रबर बैंड यारस्सी
फॉर्मेलिन
बाविस्टिन
ग्रीन नेट या पॉलीथिन शीट
पानी छिड़काव हेतु – वाटर स्प्रेयर
माध्यम – पैरा कुट्टी, पुआल, गेहू भूषा इत्यादि।

मशरूम स्पॉन बीज क्या है

मशरूम स्पॉन सरल शब्दो में एक पदार्थ है जिसे गेहू के दाने में मायसेलियम कवक के विकास जाल को फैलाया जाता है।   माइसेलियम, थ्रेड – जैसे कोशिकाओं का एक संग्रह है।  
स्पॉन का उपयोग किसी भी सामग्री पर माइसेलियम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है जिसमें से मशरूम बढ़ेगा, जिसे सब्सट्रेट [पैरा कुट्टी या गेहू कुट्टी ] कहा जाता है।Mushroom ki Kheti


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